वॉशिंगटन की गर्म दोपहर थी। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए अचानक एक बयान दिया जिसने पूरी दुनिया को चौंका दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका जल्द ही होरमुज़ जलडमरूमध्य को अपना क्षेत्र घोषित करेगा।

यह वही जलडमरूमध्य है, जहाँ से दुनिया की लगभग एक-तिहाई तेल आपूर्ति गुजरती है। दशकों से यह क्षेत्र भूराजनीतिक तनाव का केंद्र रहा है। ईरान और अमेरिका के बीच कई बार नौसैनिक टकराव हो चुके हैं।

ट्रंप ने कहा, “अमेरिका की नौसेना इस क्षेत्र में मौजूद है और हम अपने हितों की रक्षा करेंगे। बहुत जल्द यह क्षेत्र अमेरिकी नियंत्रण में होगा।” उनके इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी।

ईरान ने तुरंत प्रतिक्रिया दी। तेहरान से जारी बयान में कहा गया कि यह कदम अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून का उल्लंघन है और ईरान किसी भी बाहरी दबाव का मुकाबला करेगा। वहीं यूरोपीय संघ ने चेतावनी दी कि इस तरह की घोषणा से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और क्षेत्रीय स्थिरता पर गंभीर असर पड़ सकता है।

संयुक्त राष्ट्र ने भी चिंता जताई। महासचिव ने कहा कि होरमुज़ जलडमरूमध्य को किसी भी देश का क्षेत्र घोषित करना वैध नहीं है और इससे शांति प्रयासों को नुकसान होगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह बयान केवल राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति हो सकता है। लेकिन ऊर्जा विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका वास्तव में ऐसा कदम उठाता है तो तेल की कीमतों में तेज़ उछाल आ सकता है और कई देशों को आपात योजनाएँ बनानी पड़ेंगी।