नई दिल्ली, 15 अगस्त 2026:

भारत में थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई दर जुलाई महीने में मामूली रूप से घटकर 9.78% पर आ गई है। यह कमी मुख्य रूप से खाद्य पदार्थों, ईंधन और बिजली की कीमतों में नरमी के कारण दर्ज की गई है।

खाद्य कीमतों में राहत

जुलाई में सब्ज़ियों और अनाज की कीमतों में गिरावट देखी गई। दालों और तेलों की कीमतें भी स्थिर रहीं। विशेषज्ञों का कहना है कि बेहतर मानसून और आपूर्ति श्रृंखला में सुधार से खाद्य महंगाई पर नियंत्रण संभव हुआ है।

ईंधन और बिजली

ईंधन और बिजली की कीमतों में भी कमी आई है। कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में गिरावट और घरेलू स्तर पर सरकार द्वारा किए गए शुल्क संशोधन ने राहत दी है। इससे उद्योगों और परिवहन क्षेत्र को भी फायदा हुआ है।

आर्थिक परिप्रेक्ष्य

हालांकि WPI महंगाई दर में कमी आई है, लेकिन यह अभी भी ऊँचे स्तर पर बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार ऊँची महंगाई दर से उद्योगों और उपभोक्ताओं पर दबाव बना रह सकता है।

विशेषज्ञों की राय

अर्थशास्त्रियों का कहना है कि महंगाई में यह गिरावट अस्थायी हो सकती है।

यदि वैश्विक ऊर्जा बाज़ार में फिर से उथल-पुथल होती है तो कीमतें बढ़ सकती हैं।

सरकार को आपूर्ति श्रृंखला सुधार और नवीकरणीय ऊर्जा निवेश पर ध्यान देना होगा।