वॉशिंगटन, 14 अगस्त 2026: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में ईरान के खिलाफ चल रहे सैन्य अभियान पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका की मिसाइल भंडार तेजी से घट रहा है और प्रशासन के पास इस युद्ध को जारी रखने के लिए ठोस रणनीतिक कारण भी नहीं बचे हैं। अमेरिकी रक्षा विभाग की रिपोर्टों के अनुसार, लंबे समय तक चले हवाई हमलों और ड्रोन अभियानों ने मिसाइल स्टॉक को कमजोर कर दिया है। ईरान की रक्षा क्षमता और क्षेत्रीय सहयोग ने अमेरिकी रणनीति को और कठिन बना दिया है। ट्रंप प्रशासन पर आरोप है कि वह युद्ध को राजनीतिक औज़ार की तरह इस्तेमाल कर रहा है, लेकिन अब उसके पास नए तर्क नहीं बचे हैं। यूरोपीय देशों ने अमेरिका से संवाद और कूटनीति पर लौटने की अपील की है। संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि यदि युद्ध जारी रहा तो क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ सकता है। ईरान ने दावा किया है कि वह किसी भी बाहरी दबाव का मुकाबला करने के लिए तैयार है। रक्षा विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका को अब युद्ध की बजाय रणनीतिक वार्ता पर ध्यान देना चाहिए। मिसाइलों की कमी और बढ़ते खर्च ने इस युद्ध को अस्थिर और अस्थायी बना दिया है। ट्रंप प्रशासन का ईरान युद्ध अब मिसाइलों और बहानों की कमी से जूझ रहा है। यह स्थिति बताती है कि सैन्य शक्ति के बजाय कूटनीतिक समाधान ही क्षेत्रीय शांति का रास्ता खोल सकता है।