अंतरराष्ट्रीय राजनीति में राष्ट्रवाद का उदय एक महत्वपूर्ण और जटिल विषय है। राष्ट्रवाद का उदय विभिन्न देशों में अलग-अलग रूपों में देखा जा सकता है, और इसके प्रभाव भी विविध हैं। आइए इस विषय को विस्तार से समझते हैं:

राष्ट्रवाद का उदय:

राष्ट्रवाद का उदय 19वीं सदी में यूरोप में हुआ था, जब विभिन्न देशों ने अपनी राष्ट्रीय पहचान और स्वतंत्रता के लिए संघर्ष किया। इसके बाद, 20वीं सदी में, राष्ट्रवाद ने विश्व युद्धों और उपनिवेशवाद के अंत के साथ एक नई दिशा प्राप्त की। 21वीं सदी में, राष्ट्रवाद का उदय एक बार फिर से देखा जा रहा है, खासकर पश्चिमी देशों में।

कारण:

राष्ट्रवाद के उदय के कई कारण हो सकते हैं:

  1. आर्थिक असमानता: वैश्वीकरण और आर्थिक असमानता के कारण लोग अपने राष्ट्रीय हितों की ओर अधिक ध्यान देने लगे हैं।

  2. संस्कृतिक पहचान: लोग अपनी सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने के लिए राष्ट्रवाद का समर्थन करते हैं।

  3. राजनीतिक अस्थिरता: राजनीतिक अस्थिरता और भ्रष्टाचार के कारण लोग राष्ट्रवादी नेताओं की ओर आकर्षित होते हैं।

  4. आप्रवासन: अप्रवासन के मुद्दों के कारण लोग अपने देश की सीमाओं को सुरक्षित रखने के लिए राष्ट्रवाद का समर्थन करते हैं।

प्रभाव:

राष्ट्रवाद के उदय के कई प्रभाव हो सकते हैं:

  1. अंतरराष्ट्रीय संबंध: राष्ट्रवाद के कारण देशों के बीच तनाव बढ़ सकता है और अंतरराष्ट्रीय संबंध प्रभावित हो सकते हैं।

  2. आर्थिक नीतियां: राष्ट्रवादी नीतियों के कारण व्यापार और निवेश पर प्रभाव पड़ सकता है।

  3. सामाजिक विभाजन: राष्ट्रवाद के कारण समाज में विभाजन और असमानता बढ़ सकती है।

  4. राजनीतिक स्थिरता: राष्ट्रवादी नेताओं के कारण राजनीतिक स्थिरता में सुधार हो सकता है, लेकिन यह अस्थायी हो सकता है।

उदाहरण:

  1. अमेरिका: डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका में राष्ट्रवाद का उदय देखा गया, जिसमें "अमेरिका फर्स्ट" नीति अपनाई गई।

  2. ब्रिटेन: ब्रेक्सिट के माध्यम से ब्रिटेन ने यूरोपीय संघ से अलग होने का निर्णय लिया, जो राष्ट्रवाद का एक उदाहरण है।

  3. भारत: नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत में भी राष्ट्रवाद का उदय देखा गया, जिसमें "मेक इन इंडिया" और "आत्मनिर्भर भारत" जैसी नीतियां अपनाई गईं।

निष्कर्ष:

अंतरराष्ट्रीय राजनीति में राष्ट्रवाद का उदय एक महत्वपूर्ण और जटिल विषय है, जिसके कई कारण और प्रभाव हो सकते हैं। यह महत्वपूर्ण है कि देशों के नेता राष्ट्रवाद के सकारात्मक और नकारात्मक पहलुओं को समझें और संतुलित नीतियां अपनाएं ताकि अंतरराष्ट्रीय संबंध और आर्थिक स्थिरता बनाए रखी जा सके।

Latest News

© Samay Prasang. All Rights Reserved. Designed by Networld
No. of Visitors from 28-08-2023

Web Analytics