BSE के शेयरों में 5% की गिरावट आई है, जो Goldman Sachs द्वारा टारगेट प्राइस घटाकर ₹4,880 करने के बाद हुआ है. रिपोर्ट में प्रस्तावित रेगुलेटरी बदलावों पर चिंता जताई गई है जो BSE के रेवेन्यू को प्रभावित कर सकते हैं.
BSE Share Today: एशिया के सबसे पुराने स्टॉक एक्सचेंच बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) के शेयर में सोमवार को शुरुआती कामकाज के दौरान 5% की गिरावट देखने को मिली, जिसके बाद NSE पर यह स्टॉक 4,395.7 रुपये प्रति शेयर के भाव पर कामकाज करते दिखा. आज इस स्टॉक पर ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म Goldman Sachs ने एक नोट जारी किया है, जिसके बाद शेयर में यह दबाव देखने को मिला है.
Goldman Sachs ने इस रिपोर्ट में BSE पर टारगेट प्राइस को घटा दिया है. साथ ही कहा है कि प्रस्तावित रेगुलेटरी बदलाव प्रोपराइटरी ट्रेडर्स को प्रभावित कर सकते हैं. BSE के लिए रेवेन्यू का यह एक बड़ा स्रोत है.
टारगेट प्राइस में कटौती Goldman Sachs ने BSE के शेयरों के लिए अपना टारगेट प्राइस ₹5,650 से घटाकर ₹4,880 कर दिया है. हालांकि, उसने अपनी "Neutral" रेटिंग बरकरार रखी है. इस रिपोर्ट में कहा गया है कि BSE के औसत दैनिक कारोबार का लगभग 70% हिस्सा प्रोपराइटरी ट्रेडर्स से आता है, जिनकी गतिविधियों पर आगामी रेगुलेटरी बदलावों का असर देखने को मिल सकता है.
मार्केट रेगुलेटर सेबी ने 24 फरवरी को एक कंसल्टेशन पेपर जारी किया था, जिसमें इक्विटी डेरिवेटिव्स में ओपन इंटरेस्ट (OI) को कैलकुलेट करने के लिए तरीके में बदलाव का प्रस्ताव था. सेबी ने इस नोशनल वैल्यू के आधार पर कैलकुलेशन को बदलकर फ्यूचर-इक्विवेलेंट यानी डेल्टा के आधार पर कैलकुलेशन का प्रस्ताव रखा है. सेबी ने इस कंसल्टेशन पेपर को लेकर कहा है कि नए तरीके से OI कैलकुलेशन को अपनाने से बाजार में संभावित हेर-फेर कम होगा और डेरिवेटिव मार्केट से जुड़े जोखिम को सीमित करने में मदद मिली है.
Goldman Sachs ने इस कंसल्टेशन पेपर को लेकर कहा है कि इस बदलाव से कैश इक्विटी टर्नओवर के मुकाबले इंडस्ट्री-वाइ़ड ऑप्शन प्रीमियम कम हो जाएगा. फिलहाल, यह रेश्यो 0.4x के मुकाबले घटकर 0.3x हो जाएगा. ब्रोकरेज फर्म ने यह भी कहा कि उसे उम्मीद है कि निकट भविष्य में इंडेक्स ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए औसत दैनिक प्रीमियम कारोबार में BSE की बाजार हिस्सेदारी 30% से नीचे बनी रहेगी, जबकि फरवरी में यह 22% थी.
BSE शेयर में आज इस गिरावट के पीछे एक और वजह है. BSE के कुछ अधिकारी कानूनी जांच के दायरे में है. दरअसल, मुंबई के कोर्ट ने सेबी की पूर्व चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच के दो अधकारियों और अन्य खिलाफ FIR दर्ज करा का आदेश दिया है. ये आरोप 1994 में BSE पर एक कंपनी को लिस्टिंग की अनुमति देने में कथित अनियमितता से संबंधित है.