पटना....विश्व हिन्दी दिवस पर सभी सुधिजनों को शुभकामनाएं देते हुए समय-प्रसंग के संपादक आलोक आशीष ने हिन्दी के लिए अहर्निश प्रयास करने की जरूरत पर बल दिया।सभी भाषाओं के प्रति अनुराग रखते हुए हिन्दी की जरूरत कभी समाप्त नहीं होगी। आज अंग्रेजी तबीयत भी हिन्दी पर हावी हो रही है। इसके लिए सभी जिम्मेदार लोगों को सोचना होगा ! संस्कार,संस्कृति, सभ्यता ही हिन्दुस्तानी डीएनए में है परंतु हिंग्लिश के चलते नुकसान हुआ है,तथाकथित प्रतियोगिताओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों को हिन्दी भाषा में पुस्तक के लिए आज भी परेशानी होती है।आज भी हिन्दी अनुरागियों को भाषा के प्रति लगाव तो है लेकिन वे इसके प्रयोग में कोताही बरतते हैं।दिल्ली से हमारे विधि ब्यूरो रंजीत गिरि ने खबर दी है कि यहां भी विश्व हिन्दी दिवस पर कयी जगह कार्यक्रम तो किए गए लेकिन एक बात अधिकांश जगह देखी गई
हिन्दी बोलचाल की शैली में कम प्रयोग में पढ़े-लिखे लोग ही करते,क्योंकि तबीयत अंग्रेजियत की है।लखनऊ ब्यूरो सृष्टि कृष्णा ने खबर दी है कि उत्तर प्रदेश शासन द्वारा हिन्दी दिवस पर विशेष ध्यान दिया जाता है और लोगों को खड़ी हिन्दी बोलने की यहां आदत सी है। हिन्दी की समृद्ध परंपरा के लिए यहां माकूल मौका मिल जाते हैं।नोएडा से कवित्री व पत्रकार संयोगिता सुमन ने खबर दी है कि विश्व हिन्दी दिवस पर संदेश सभी भारतवंशी की अकुलाहट तेज हो जाती है लेकिन' मोर पंख सा खूबसूरत हमारे पैर नही' वाली कहावत है रही है। पटना से सांस्कृतिक संवाददाता रेणु सिंह ने बिहार विधानसभा के माननीय अध्यक्ष को विश्व हिन्दी दिवस पर जनसंदेश के लिए बधाई देते हुए कहा है कि सभी को पुरस्कार की खुशी और दंड का भय होना जरूरी है ताकि अपने ही देश में बेगाना न हो सके'।बहरहाल हिन्दी के पक्षधर तो बहुतायत संख्या में लोग मिले हैं लेकिन हिंग्लिश के समर्थकों की भी बहुतायत संख्या है।पत्रकार जे.रूद्रदेव,डॉ कुमुद वर्मा, डॉ प्रो.रश्मि झा, प्रो.गौरी चौधरी, रीता हजारी,काव्या,अनुजा समेत अन्य वक्ताओं ने समय प्रसंग कार्यालय में हिन्दी दिवस पर अपने विचार व्यक्त किए।