(हास्य/व्यंग्य)....देशभक्ति में घोर आस्था रखने वाला एक भारतीय एवरेस्ट की चोटी पर जाकर कठोर तपस्या में लीन हो गया अर्धनग्न अवस्था में भूख प्यास त्याग तपस्यारत भक्त की स्थिति को देखकर इंद्र की गद्दी भाइब्रेट करने लगी। भक्त की भक्ति से ज्यादा इंद्र के भय और अनुनय-विनय वाली इमोशनली प्रेशर में अंततः ब्रह्माजी को तपस्यारत भक्त के सामने प्रकट होना पड़ा। "हम तुम्हारी तपस्या से प्रसन्न हुए,आँखें खोलो पुत्र...परमपिता की आवाज को नजरअंदाज कर भक्त समाधि में उसी प्रकार तल्लीन रहा, जिस प्रकार मोबाइल में फेसबुक उपभोक्ता ! ब्रह्माजी बार-बार पुकार रहे थे लेकिन ढीठ भक्त अपनी आँखें खोलकर तपस्या भंग करने के मूड में नहीं था। खीजकर ब्रह्माजी चिल्लाए आखिरी बार बोल रहा हूँ, आँखे खोलो,अन्यथा हम लौट रहे हैं ब्रह्मलोक को...ब्रह्माजी का अल्टीमेटम सुन भक्त ने कनखियों से ब्रह्माजी की ओर देखा। साक्षात चतुर्भुज को सामने देख मारे खुशी के उछल पड़ा- क्षमा प्रभु क्षमा । मुझे लगा कोई आपके नाम पर मेरी फिरकी ले रहा है इसलिए जानबूझकर अँखियां मूँद कर खड़ा रहा। प्रभु मैं आपका सबसे बड़ा भक्त हूँ! ब्रह्माजी मुस्कुराते हुए बोले-भक्त तो राजनेताओं के होते हैं वत्स! तुम तो मेरे मानस पुत्र हो! हम तुम्हारी तपस्या से काफी प्रसन्न हैं माँगों! क्या चाहिए? ब्रह्मा जी के डोनर मूड को देखते हुए भक्त बोला- प्रभु आपकी दया से ऑलरेडी मेरे पास बंगला है, गाड़ी है, बैंक बैलेंस...तो माँ चाहिए तुम्हे ? (ब्रह्मा जी ने बीच में ही टोका)।आप भी न प्रभु खामखां ब्रह्मा से बच्चन बने जा रहे हैं कृपया मेरी पूरी बात तो सुन लीजिए! शीघ्र और संक्षेप में बताओ वत्स मेरे पास समय कम है (ब्रह्माजी ने आगाह किया)।आपको क्या लोकसभा चुनाव में किसी पार्टी का प्रचार करने जाना है प्रभु जो टाइम का टोटा है? वत्स तुम भी न! अच्छा चलो समय दिया माँगों , क्या चाहिए। (खीजकर ब्रह्मा जी बोले ) । प्रभु मुझे वरदान दें कि मैं अगले छः जन्म भारत में ही जन्म लूँ ! भक्त की बात सुन ब्रह्माजी मुस्कुराते हुए बोले- धन्य हो वत्स! कितनी साधारण इच्छा है तुम्हारी समझ गया तुम पृथ्वी के ऐसे भूखंड पर जन्म लेना चाहते हो जो देवभूमि है जहाँ राम, कृष्ण, बुद्ध,महावीर ने जन्म लिया है। ऐसी बात नहीं है प्रभु दरअसल हमारा देश भारत संपूर्ण ब्रह्मांड में अद्वितीय है। प्रभु यह ऐसा राष्ट्र है जहाँ ब्लड रिलेशन से ज्यादा तवज्जो डेमोक्रेसी को दिया जाता है। भारतीय लोग भले ही अपने बेटे-बेटियों की शादी अंतर्जातीय में कर दे लेकिन मतदान जाति देखकर ही करते हैं! इस भारतीय धरा पर भले ही योग्यता धरी की धरी रह जाए लेकिन सरकारी नियोजन, प्रमोशन और योजनाओं के क्रियान्वयन में जाति प्रमाण पत्र की निकल पड़ती है। यह वह भूखंड है प्रभु जहाँ चित्रगुप्त की दंड संहिता वाली धार्मिक पुस्तक से भी बड़ी विश्व की सबसे बड़ी विधि पुस्तक(संविधान) द्वारा विधि विधान का नियमन किया जाता है। अब इस पुण्य प्रदेश की और कितनी महिमा गाऊं प्रभु इस पावन भूमि पर जीवन के तीस पैंतीस साल सरकारी सेवा देने वालों को भले ही पेंशन ना मिले लेकिन तीर तुक्का एवं जोड़-जुगाड़ से एकबार माननीय विधायक अथवा सांसद पद धारण करने वाले खादी मानव को पदमुक्ति से प्राणमुक्ति तक सभी प्रकार का भत्ता प्राप्त होता है। आप इस देश में जन्म लेकर भी शत्रु मुल्क के जिंदाबाद का उदघोष कर सकते हैं...लेकिन वत्स जब जन्म ही लेना है तो अमेरिका, रूस, चाइना जैसे अमीर और श्रेष्ठ देशों में जन्म लो भारत में ही क्यों? ब्रह्माजी ने बीच में ही टोका। ब्रह्मा जी की बातों से भक्त काफी आहत हुआ, फिर संभलते हुए बोला प्लीज डोंट ट्राय टू मिसगाइड मी प्रभु फॉर योर काइंड इन्फॉर्मेशन सर्वाधिक जनसंख्या वाले चाइना में भी वीवीआईपी लगभग साढ़े चार सौ और यूएसए में महज ढाई सौ हैं, तो आप ही बताइए पाँच लाख अस्सी हजार वीवीआईपी की संख्या वाले भारतवर्ष में जन्म लेना अच्छा विकल्प है या फिर अल्प सीट वाले देशों में जन्म लेकर बैकुंठ सुख सदृश वीवीआईपी पद प्राप्ति के लिए मगजमारी करने में!कहने को तो आप सर्वव्यापी और सर्वज्ञानी कहलाते हैं लेकिन नॉलेज लोकल न्यूज चैनल वाली भी नहीं रखते हैं। अब सपोज हम अमेरिका के प्रसिडेंट या चीन में कोई मंत्री बन भी गए तो क्या उखाड़…क्षमा प्रभु ! आवेश में शब्दों का समायोजन नहीं कर पा रहा। मेरा आशय है कि क्या कर पाऊंगा। यदि अमेरिका का प्रेसिडेंट बन जाऊँ तो चार साल बाद जीवन यापन के लिए किसी पिज्जा बर्गर कंपनी में डिलिवरी ब्वॉय बनना पड़ेगा अथवा चाइना का ही मंत्री बन गया और मोहवश सरकारी कोष से थोड़ी-बहुत हेराफेरी कर दी तो चाइनीज़ सरकारी विधान से फांसी पर लटका दिया जाऊँगा। इन मामलों में हमारा भारत सहिष्णु और उदार है। एक बार संसदीय राजनीति में एंट्री करने भर की देर है फिर तो बल्ले-बल्ले! परिवार से दूर के रिश्तेदार तक को राजनीतिक अथवा सरकारी पदों पर पदासीन करने का कॉपीराइट नेचुरली प्राप्त हो जाता है। रही बात रिटायरमेंट की तो आर्यावर्त की पॉलिटिक्स में कभी कोई रिटायर नहीं होता। स्थायी आजीवन पेंशन और अन्य भत्ता के साथ-साथ अवसर अनुकूल विभिन्न पार्टियों से जुड़कर 'स्व' जन सेवा करते रहने की असीम संभावनाएँ उपलब्ध हैं।दूसरी बात मेरा देश सर्वश्रेष्ठ है। अतः अमेरिका चाइना रूस आदि से इसे कमतर आँक कर आप मेरी राष्ट्रभक्ति को आहत करने का दुस्साहस ना करें। आपकी जानकारी के लिए बता दूँ धन-धान्य के मामलों में हमारा देश अमेरिका और चाइना से भी आगे है। हम भारतीय नेताओं/अभिनेताओं/व्यापारियों/संस्थानों के खरबों की राशि से ही स्विस बैंक पुष्पित-पलल्वित होता है। हमारे यहाँ सरकारी इंजीनियर या किरानी के घर भूले से भी छापा पड़ जाए तो अरबों रूपये के कैश जेवरात प्रॉपर्टी मिल जाती है। खबरदार प्रभु जो हमारे देश को गरीब और भुक्खड़ कहा तो! थोड़ी देर के लिए मैं आपकी भक्ति भूल सकता हूँ लेकिन राष्ट्रभक्ति कदापि नहीं! वंदे मातरम! भारत माता की जय...! भक्त को उद्वेलित होता देख ब्रह्मा जी सकुचाते हुए बोले-अरे तुम तो नाहक क्रोधित हो गए वत्स।भक्त- आप तो बात ही उत्तेजित करने वाली कर देते हो! कैसे कहते हो मेरा भारत गरीब देश है। अरे प्रति वर्ष यहां अरबों-अरब का घोटाला हो जाता है फिर भी अर्थव्यवस्था की अवस्था सदैव तंदुरूस्त ही रहती है।लेकिन वत्स तुम्हारे सोने की चिड़िया को पहले अंग्रेज बिल्लौटा ने नोचा और अब खादी बागड़ बिल्ले.......... ब्रह्माजी की बात को काटते हुए भक्त बोल पड़ा आप भी न हद भौकाल मचाते हैं स्वामी। इसलिए केवल पुष्कर में ही सीमित हो कर रह गए हैं। जब देश अपना है, राजकोष अपना है तो अपने लोग ही खाएंगे न! या खाने के लिए होनोलूलू से नेता कर्मचारी और पदाधिकारी आएगा। व्यग्र भक्त का तर्क और देवभूमि पर शेष छः जन्म पदार्पण की उत्कट इच्छा सुनकर ब्रह्माजी समझ गए कि भारतीय भक्त को बरगलाना व्यर्थ है,अंततोगत्वा ‘तथास्तु’ कह वो अंतर्धान हो गए।

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