भारत ने पिछले दशकों में Samyukta (ग्राउंड ईडब्ल्यू सिस्टम), Samudrika (नेवल ईडब्ल्यू प्रोग्राम) और Swayam Raksha Kavach (एयरबोर्न ईडब्ल्यू सूट) जैसे कई आधुनिक सिस्टम विकसित किए हैं। DRDO ने counter-drone jammer systems और AI-powered counter-UAV technologies भी तैयार किए हैं। भारत की ईडब्ल्यू आर्किटेक्चर दुश्मन ड्रोन को रोकने में सक्षम है, लेकिन अपने ही UAVs को शत्रु ईडब्ल्यू हमलों से बचाने में कमजोर है। भारतीय UAVs में jam-resistant data links और autonomy logic की कमी है। इसका मतलब है कि वही इलेक्ट्रोमैग्नेटिक डिनायल तकनीक जो दुश्मन ड्रोन को रोक सकती है, भारत के अपने ड्रोन बेड़े को भी निष्क्रिय कर सकती है। CLAWS (Centre for Land Warfare Studies) की चर्चाओं में यह सामने आया कि भविष्य के युद्ध spectrum dominance और AI-driven EW systems पर आधारित होंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत को cyber-electromagnetic convergence और autonomous adaptive systems पर निवेश बढ़ाना होगा। भारत की ई-वारफेयर क्षमता ने उल्लेखनीय प्रगति की है, लेकिन resilience gap को दूर करना अनिवार्य है। UAVs को jam-resistant और autonomous बनाना होगा। Cyber और EW क्षमताओं का एकीकृत विकास ज़रूरी है। कोर्स करेक्शन के बिना भारत की डिजिटल युद्ध क्षमता अधूरी रह जाएगी।