हसनपुर(समस्तीपुर).....कलियुग में भी कहा जा सकता है कि'भगवन को चिंता रहती है भक्तों के कल्याण की, यह कहते हुए सुभाष चन्द्र झा उर्फ विदुर जी झा जी की आंख छलक आयींं क्योंकि पटसा गांव के प्रतिष्ठित मनोकामना हनुमान मंदिर पर अष्टयाम पूर्णाहुति के विसर्जन मौके पर अनायास एक विशाल बंदर वहां आ कर प्रसाद ग्रहण करने लगे। प्रत्यक्षदर्शी अविनाश झा उर्फ शनि जी ने मीडिया को बताया कि उक्त कपि को लोग हनुमान जी की प्रतिमूर्ति मानते हैं और पूजन कर रहे हैं।इस आस्था को लोग,समर्पण मान रहे हैं। मनोकामना हनुमान मंदिर के पास ही जनकल्याण के लिए शनिवार से आयोजित अष्टयाम में भक्तों की भीड़ जुटी। रविवार को उक्त महायज्ञ के विसर्जन मौके पर अनायास एक वानर का प्रकट हो जाना और फल खाने लगना, चर्चा का विषय बना हुआ है।हरिश्चंद्र झा उर्फ गोपाल जी झा जो इस आयोजन के कर्ताधर्ता रहे, अपने पर हनुमान जी की कृपा मान रहे हैं। यज्ञ पुरोहित मनोज झा जी का मानना है कि निष्ठा से प्रतिष्ठा तक महावीर दर्शन का बहुमूल्य लाभ जरूर मिलता है।लोगों ने बताया कि उक्त मंदिर ने अपने सौ साल का समय देखा है।इसकी स्थापना ऋषि अवधूत बाबा ने बड़े ही निष्ठा से किया । कृष्ण चंद्र झा, अखिलेश्वर झा, कामाख्या मिश्र, संतोष झा,अविनाश झा उर्फ शनि, अंकित बाबुल,श्यामा देवी, रंजू देवी, कामिनी देवी,रिंकू रानी समेत कई लोगों ने आयोजन को सफल बताया।

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