पटना....हर काल में मानव समाज के सोचने का तौर-तरीका भिन्न रहा है लेकिन सनातन संस्कृति की सिद्धियों, सिद्धांतों और उसे ग्रहण करने वालों ने सदा एक समान खुद को प्रतिबद्ध रखा है। यही कारण है कि भारतीय समाज संस्कृति में नूतन और पुरातन सभी स्तरों पर लचीलापन के साथ 'मन चंगा तो कठौती में गंगा ' की बातें कहीं गई। उपरोक्त बातों के पीछे देश के मूर्धन्य ज्योतिष दैवज्ञ शिरोमणि पं.गणेश कांत झा ने कहा कि भारतीय सनातन धर्म ने समाज को काफी लचीला तथा सारगर्भित संस्कृति दिया है जिसे मानते हुए लोग उसे अपनाते रहे हैं और गर्व से कहते हैं कि हम सनातनी हैं। कल,यानि रविवार को मोहिनी एकादशी व्रत के लिए सभी की उत्कंठा है। वैशाख माह के शुक्ल पक्ष को मोहिनी एकादशी व्रत किया जाता है।नेम,नियम, निष्ठा से किया जाना इसकी विशेषता है। गृहस्थ जीवन में शुचिता के साथ किया गया व्रत या दान कार्य लाभ प्रद है।

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