दरभंगा...श्यामा मंदिर में प्रथा पर रोक लगाने का मामला गंभीर होता हुआ जा रहा है। रविवार को विभिन्न संगठनों के लोग आपसी मतभेद को छोड़ बली प्रथा पर रोक लगाने के विरुद्ध में एकजुट होकर चरणबद्ध आंदोलन करना शुरू कर दिया है।इंद्रभवन मैदान में बैठक कर मिथिला संस्कृति संरक्षक समिति का गठन किया गया जिसमे विभिन्न दल के नेता व आम जनमानस शामिल हुए। वक्ताओं ने कहा श्यामा मंदिर आम मंदिर है ही नहीं। आज बिहार राज्य धर्म न्यास बोर्ड भूल रहा है की जिस महाराज रामेश्वर सिंह के चिता पर यह मंदिर बना है वो अपने समय में संपूर्ण भारत के धर्म महामंडल के अध्यक्ष थे और तात्कालिक भारत के सर्वाधिक सिद्ध तांत्रिकों में से एक थे। श्मशान भूमि में उनके चिता पर यह काली मंदिर स्थापित करने का एक वजह यह था की यह तंत्र उपासना का मंदिर है। तंत्र उपासना पूजा पद्धति का ऐसा रूप है जो वैदिक, भक्ति, मांत्रिक, पौराणिक आदि पूजा पद्धतियों से बिल्कुल अलग है। इसका विधि, विधान सब अलग होता है। यह पूजा पद्धति पंचमकार यानि की मत्स्य, मांस, मुद्रा, मद्य, मैथुन के बिना हो ही नहीं सकता। तंत्र उपासना के लिए बने काली मंदिर में कहीं बलिप्रदान रोका जाए, धर्म न्यास बोर्ड को तनिक भी धर्म का ज्ञान होता तो ऐसा भयावह निर्णय नहीं लेता। 1933 में यह मंदिर बना था, 1934 में ऐसे ही किसी अज्ञानी ने बलिप्रथा पर नाक भौं सिकोड़ा था, 10 दिन बाद पूरा मिथिला भूकंप में क्षत विक्षत हो गया था। काली के कोप से डरो, उनका ग्रास रोकोगे तो वो सबको ग्रास बना लेगी जिसके बाद बैठक को आगे बढ़ाते हुए रंगनाथ ठाकुर,गोपाल चौधरी, आदित्य नारायण मन्ना, प्रदीप गुप्ता और सुधांशु शेखर को प्रशासनिक वार्ता के लिए नियुक्ति दिया गया। जागरूकता के लिए मुकेश कुमार, मधुकर झा, वीरेन कुमार को मीडिया प्रभारी के लिए अमन सक्सेना, प्रियांशु कुमार, अर्जुन दास, राहुल ठाकुर और पंकज झा को कोषाध्यक्ष के लिए पप्पू कुमार, उग्रनाथ मिश्रा, अमित सांडिल्य को जबकि पीआईएल के लिए अविनाश झा और प्रियांशु झा को नियुक्ति दिया गया है। जिसके बाद समिति के सदस्य श्यामा मंदिर पहुंचकर बली प्रथा चालू करो परम्परा से खिलवाड़ करना बंद करो मिथिला विरोधी सावधान श्यामा न्यास समिति इस्तीफा दो जैसे नारेबाजी किया। पुनः मुख्य द्वार पर आकर एके जैन का पुतला दहन किया गया और घोषणा किया गया की मंगलवार की संध्या को आयकर चौराहा से श्यामा मंदिर परिसर तक मसाल जुलुस निकाला जाएगा। अगर इसपर तत्काल रोक नहीं लगता हैं तो 25 दिसंबर को गांव-गांव से हजारों लोगो को लाकर बली प्रदान करने का काम किया जाएगा और यह आंदोलन और भी उग्र होता जाएगा, अन्यथा तत्काल इस तुगलकी फरमान को वापस लिया जाए। इस निर्णय में उदय नारायण झा, गोपाल चौधरी, आदित्य नारायण मन्ना, अमन सक्सेना, रंगनाथ ठाकुर, अविनाश झा, मुकेश दास, मीणा झा, अमित कुमार, उग्रनाथ मिश्रा, पंकज झा, प्रियांशु झा, शशि प्रदीप गुप्ता, पप्पू चौधरी, सुधांशु शेखर, राहुल झा, श्याम सुंदर झा, नीरज भारद्वाज, अनीश चौधरी, अर्जुन कुमार, अमित मिश्रा, अंकित आज़ाद, जनार्दन मिश्रा, वीरेंद कुमार, सुजीत मल्लिक, बालेंदू झा, बबलू मिश्रा, मनीष मिश्रा, राहुल सिंह समेत कई अन्य लोग शामिल रहे।

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