पटना....बिहार में डेंगू और फ्लू यानी सर्दी-खांसी, बुखार व डायरिया को लेकर लोगों को ज्यादा तनाव में आने की जरूरत से ज्यादा सतर्क रहने की सलाह चिकित्सक ने दी है तथा सीजनल फ्लू यानी फीवर की दवा लेने से पहले डॉ की सलाह अवश्य लें सुझाव देते हुए डॉ.बी.के.चौधरी ने कहा कि दवा हमेशा चिकित्सक की परामर्श से ही लेना चाहिए।बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव भी इस मसले पर गंभीर हैं।मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक सप्ताह तक सीजनल फ्लू से खुद परेशान रहे हैं। इसी वजह से वे राजगीर महोत्सव का उद्घाटन करने नहीं जा सके। डॉक्टरों की सलाह पर वे दवाई खा रहे हैं। लेकिन, डेंगू से महफूज हैं। उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव भी चार-पांच दिन तक फ्लू यानी सर्दी-खांसी, बुखार से पीड़ित रहे हैं। यही वजह है कि वह नीतीश कुमार के साथ कार्यक्रमों में कहीं नही दिखाई दिये। उधर, पूर्वी बिहार के भागलपुर जिले में डेंगू के मरीज फिर बढ़ने लगे हैं। शनिवार यानी 16 दिसंबर को डेंगू के 3 नये मरीज मिले हैं। तीनों का एनएस एंटीजन टेस्ट में रिपोर्ट पाॅजिटिव आई है। डेंगू कन्फर्मेशन के लिये सैंपल लेकर एलिजा जांच के लिये जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज अस्पताल, भागलपुर के माइक्रोबॉयोलॉजी विभाग में भेजा जायेगा। फिलहाल मायागंज अस्पताल में पांच डेंगू मरीजों का इलाज चल रहा है। शनिवार को एक डेंगू मरीज के ठीक होने पर उसे डिस्चार्च कर दिया गया है। इधर, सूबे बिहार में डेंगू के मरीजों के मिलने की रफ्तार में कमी जरूर आई है। लेकिन, मरीज मिलने बंद नहीं हुये हैं। दरअसल, राज्य के विभिन्न शहरों में कई जगहों पर अब भी जलजमाव हैं। इस कारण वहां डेंगू के मच्छर पनप रहे हैं। राज्य में डेंगू की तादाद बढ़कर अब 18159 हो गयी है। पीएमसीएच के वरीय फिजिशियन डॉ.बी.के.चैधरी का कहना है कि जांच में यदि रिपोर्ट पॉजिटिव आती है तो चिकित्सक की सलाह पर दवा लें। खुद दवा खरीदकर नहीं लें। डेंगू का कोई विशेष इलाज नहीं है। सिम्टोमेटिक इलाज चलता है। मरीज को दर्द की दवा नहीं लेनी चाहिये। शरीर में पानी की कमी नहीं होनी चाहिये। मरीज को खूब पानी, जूस या कोई अन्य तरल पदार्थ का नियमित सेवन करना चाहिये जिससे शरीर डिहाइड्रेट नहीं हो। वहीं, विशेषज्ञों का कहना है कि ठंड ठीक से पड़ने पर ही डेंगू का प्रकोप खत्म होगा। ठंड की शुरुआत अभी उस तरह से नहीं हुई है। चार-पांच दिनों से ठंड जरूर बढ़ी है। सूबे बिहार में अभी तक डेंगू से मौत भी हुई है। मुजफ्फरपुर जिले में इस सीजन में अब तक कुल मरीजों की तादाद 579 हो गई है। अब तक सबसे ज्यादा 159 मरीज मुशहरी में और 118 मरीज शहरी क्षेत्र में मिले हैं। जिला मलेरिया पदाधिकारी डॉ. सतीश कुमार का कहना है कि जहां भी डेंगू मरीज मिल रहे हैं, उसकी सूची बनाकर मरीज के घर व आसपास फॉगिंग कराई जा रही है। दूसरी ओर रहस्यमयी निमोनिया या सीवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी इंफेक्शन यानी एसएआरआई का 20 दिन में एक भी मरीज नहीं मिला है। राज्य के मुख्य निगरानी पदाधिकारी डॉ.रणजीत कुमार का कहना है कि चीन के रहस्यमयी निमोनिया के बाद स्वास्थ्य महानिदेशक के पत्र के आलोक में सभी जिलों से एनफ्लुएंजा लाइक इलनेस, निमोनिया या सार्स कोव-2 लक्षण वाले रोगियों की जानकारी मांगी गई थी। अब तक मिली रिपोर्ट में सिर्फ सर्दी-खांसी व बुखार पीड़ित बच्चे ही मिले हैं। गंभीर श्वसन संक्रमण एसएआरआई या सार्स कोव-2 के मामले सामने नहीं आये हैं। यह निगरानी कार्यक्रम अभी चलता रहेगा। हालांकि, उन्होंने कहा कि इन रोगों के अनुकूल मौसम को देखते हुये कोरोना से बचाव वाली ऐहतियात जैसे अंजान सतह छूने के बाद हाथ धोना या सैनिटाइज करना, मास्क पहनना, सार्वजनिक स्थलों पर शारीरिक दूरी बनाये रखने की भी सलाह दी गई है। वहीं, पीएमसीएच के श्वसन रोग विशेषज्ञ डॉ.बी.के.चैधरी ने बताया कि चीन का रहस्यमी निमोनिया डेनमार्क-नीदरलैंड, अब यूरोप, अमेरिका, स्विटजरलैंड व स्वीडन तक पहुंच चुका है। यह रोग छोटे बच्चों को हो रहा है और प्रदेश के बच्चे सामान्यतः विदेश यात्रा नहीं करते इसलिये उसका खतरा कम है। हालांकि, इस बीच देश में कोरोना के मामले बढ़े हैं। एनफ्लुएंजा लाइक इलनेस, सीवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी इंफेक्शन या कोरोना सब श्वसन संबंधी ही रोग है, ऐसे में तीनों से सावधानी जरूरी है।

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