सोनपुर कोर्ट.....दीपावली की गरमाहट चारो तरफ फैलती जा रही है।हर कुम्हार जो मिट्टी से दीप ही नहीं बल्कि दीपावली में उपयोग आने वाले हर समान के निर्माण में दिन- रात लगे हुए हैं। साल में एक ही वार उनको मोटी कमाई का अवसर आता है वह है दीपावली। गरीब हो या अमीर हर क्षण वह किसी के घर में खेल रहे बच्चे अपने मन पसंद घरोंदा सजाने तथा कुल्हिया चुकिया में काम आने वाले समान अवश्य खरीदते हैं। कुम्हार लोग इन समानों के निर्माण में दिन-रात लगे हुए हैं।सच तो यह है कि दीपों को आकार देने वाले कुम्हारों के दर्द और टीस को महसूसने वाला शायद कोई नहीं है। वेजान मिट्टी की मूर्तियों में जान फूंकने वाले कुम्हारों की जिन्दगी उपेक्षा और तिरस्कार का दंश सहते -सहते बेजान सी हो गई है।मिट्टी से आत्मीय सरोकार रखने वाले कुम्हारों की मिट्टी में रहना ही नियति हो गई है। आधुनिक चका चौन्ध की दुनिया में मिट्टी के दीप जलाने की परम्परा दिनों-दिन क्षीण पड़ती जा रही है। एक समय था, जब घरों में दैनिक उपयोग की तमाम वर्तनों से लेकर साज सजावट की वस्तुएँ भी मिट्टी से बने होते थे और इन सबके सृजन कर्ता थे आदि शिल्पकार तथा प्रकृति के सहज चितेरा कुम्हार ।विद्युत बल्ब जलाने के प्रचलन और प्लास्टिक तथा सस्ते धातु अल्मुनियम के वर्तन के बढ़ते उपयोग से कुम्हारों की पेशा को जबरदस्त धक्का लगा है। पूरे बिहार में कुम्हारों की करीब लाखों की आबादी है। आजादी के 75 वर्ष बाद भी अधिकांश इस जाति के लोग अपनी पुरानी परम्परागत पेशा के माध्यम से ही अपना तथा अपने परिवार की आजीविका चलाते हैं। लोक सेवा आश्रम हरिहर क्षेत्र सोनपुर के सटे कुम्हारों के कई परिवार अपना-अपना कच्चा-पक्का घर बनाकर रहते हैं। इनका कहना है कि सरकारी नौकरी नहीं मिलने के कारण अपनी खानदानी पेशा को जीवित रखे हुए हैं। कहते है जबसे सोनपुर में दीपोत्सव शुरू हुआ है तब से ग्रीन सोनपुर-क्लिन सोनपुर एवं हरिहर क्षेत्र जनजागरण मंच के प्रणेता सह समाजसेवी अनिल कु. सिंह एक माह पूर्व कुम्हार परिवार को थोक संख्या में एक साईज के दीप तैयार करने का आदेश के साथ अग्रिम भुगतान भी कर देते है । ससमय आदेश के अनुसार दीप तैयार कर दीप उपलब्ध करा देते है।सच तो यह कि दूसरों की रोशनी के लिए दीप बनाने वाले कुम्हार जाति की जिंदगी में रोशनी का अभाव झलक रहा है,अत्याधुनिक तरह-तरह के निर्मित चाइनीज़ 'वस्तुओं की खपत इतनी बढ़ गयी है कि मिट्टी का सिर्फ दीप पूजा घर मे अवस्थित देवी -देवता के समक्ष जलाया जा रहा है। दीप की खपत पहले की अपेक्षा कम हो गयी है ।हर कोई अपने घर के सजावट दीपावली के अवसर पर दीप से नहीं बल्कि चाइनीज बल्व या अन्य चाइनीज समानों से कर रहा है। यह कुम्हारों के आर्थिक जीवन के लिए विष का काम कर रहा है ।

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