नई दिल्ली, 13 अगस्त 2026: अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने 2026 के लिए तेल आपूर्ति का अनुमान घटा दिया है। इसका कारण है होरमुज़ जलडमरूमध्य में बढ़ती अस्थिरता और आपूर्ति श्रृंखला में गहराता व्यवधान। यह क्षेत्र वैश्विक तेल व्यापार का सबसे अहम मार्ग है, जहाँ से दुनिया की लगभग एक-तिहाई कच्चे तेल की आपूर्ति होती है। IEA का नया पूर्वानुमान 2026 के लिए तेल आपूर्ति अनुमान में महत्वपूर्ण कटौती की गई है। होरमुज़ संकट के कारण कई देशों को वैकल्पिक मार्गों और भंडारण पर निर्भर रहना पड़ रहा है। IEA ने चेतावनी दी है कि यदि स्थिति और बिगड़ती है तो वैश्विक ऊर्जा बाज़ार में कीमतों में तेज़ उछाल देखने को मिल सकता है। वैश्विक असर एशिया: भारत, चीन और जापान जैसे देशों पर सबसे अधिक असर क्योंकि इनकी ऊर्जा ज़रूरतें आयात पर निर्भर हैं। यूरोप: वैकल्पिक स्रोतों की तलाश तेज़, LNG और नवीकरणीय ऊर्जा पर ध्यान बढ़ा। अमेरिका: घरेलू उत्पादन बढ़ाने और रणनीतिक भंडार का उपयोग करने की तैयारी। विशेषज्ञों की राय ऊर्जा विश्लेषकों का कहना है कि होरमुज़ संकट केवल आपूर्ति का मुद्दा नहीं, बल्कि भूराजनीतिक तनाव का भी संकेत है। यदि स्थिति जल्द नहीं सुधरी तो यह वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा असर डाल सकती है। कई देशों ने ऊर्जा सुरक्षा को लेकर आपात योजनाएँ तैयार करनी शुरू कर दी हैं। IEA की रिपोर्ट ने साफ कर दिया है कि होरमुज़ जलडमरूमध्य में गहराता संकट 2026 की वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य को बदल सकता है। तेल आपूर्ति में कटौती से न केवल कीमतें बढ़ेंगी बल्कि देशों को अपनी ऊर्जा नीतियों पर पुनर्विचार करना होगा।